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General Secretary

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ए0 के0 सक्सेना एडवोकेट
नेशनल सिल्वर मेडलिस्ट हॉकी

महासचिव – उ.प्र. रग्बी फुटबॉल एसोसिएशन

पूर्व महासचिव – उ.प्र. सिविल सर्विसेज खिलाड़ी एसोसिएशन

संयुक्त सचिव – डेफ क्रिकेट इंटरनेशनल फेड़रेशन

उ0प्र0 नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन एक अम्बरैला बॉड़ी

उ0प्र0 नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन एक पंजीकृत व खेल विभाग उ.प्र. से मान्यता प्राप्त खेल संघ है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राचीन, लोक, पराम्परागत, भूले-बिसरे खेल, नॉन ओलम्पिक तथा ग्रामीण खेलों को आगे बढ़ाना है, ताकि ग्रामीण – सामुदायिक मनोरंजन, खेल भावना, स्वास्थ मानसिकता, आपसी मेल- मिलाप, शरीर व मस्तिष्क का विकास तथा सस्ते रोजगार परक खेलों को मनोरंजक साधन उपलब्ध कराके विकास की जागरुकता पैदा करके ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे लाया जा सके। UPNOA प्रदेश के प्रचीन – पराम्परागत खेल जो आज के ग्लैमर के युग मे लुप्त होने के कगार पर है- ऐसे सभी खेलों की उनकी पहचान वापस दिलाने के मिशन पर 2000 से कार्य कर रहा है। हमारी खेल संस्था देश व प्रदेश में ऐसे पराम्परागत, प्राचीन, ग्रामीण, तथा नॉन ओलम्पिक खेलों तथा प्रदेश की लोक कलाओं के अस्तित्व को बचाये रखने एवं उन्हे लोकप्रिय बनाकर अर्न्तराष्ट्रीय दर्जा प्रदान कराने के संकल्प को आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि ऐसे सभी खेल यथा कैरम, शतरंज, मलखम्ब, पंजा रेसलिंग, आत्या-पात्या, पतंगबाजी, कुंग-फू, फिटनेस बॉल तथा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 70 से अधिक खेले जाने वाले पराम्परागत खेल भारतीय परिवेश में ओलम्पिक मे सम्मिलित हो सके। UPNOA इन सभी खेलों की UMBRELLA BODY है।

UPNOA का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गली मोहल्ले में TALENTS की भरमार है। ऐसे टैलेन्ट को चिन्हित कर खेल सुविधायें उपलब्ध कराकर गांवों व शहर के बीच की दूरी कम हो सकती है, तथा उनको देश की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकता है। ओलम्पिक खेलों की पदक तालिका के इतिहास में भारत ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में दो बार ही स्वर्ण पदक जीता। जब तक खेलों से राजनीति बाहर नही होगी- कमजोर चहेतों को बाहर नही रखा जायेगा तब तक 140 करोड़ आबादी वाला भारत देश 2 गोल्ड पर ही खुशी मनाता रहेगा। क्या 140 करोड़ आबादी दो गोल्ड मेड़ल ही डिजर्व करती है। क्या हमारा टैलेन्ट बुधिया की तरह फटे जूते में भागता रहेगा। उ.प्र. ओलम्पिक संघ के पुरोधा अपने आप को खुद को ओलम्पिक मे 5 बार भाग लेने पर अपनी उपलब्धि मानते हैं और खुद को देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार पद्मश्री आदि के लिए नामित करा लेते हैं। देश मे और भी खेल जिन्हे हम नॉन ओलम्पिक कह सकते हैं ऐसे खेलों पर कोई दानदाता आर्थिक सहयोग प्रदान करना नहीं चाहता इन बिन्दुओं को मैं माफी के साथ जोड़कर लिख रहा हूँ।

गली – घरों और मोहल्लों में होने वाले इन पराम्परागत खेलों जिन्दा रखना और इन खेलों को खेल के मैदान में कराना UPNOA का उद्देश्य है। यह खेल आजकल मोबाइल, इंटरनेट व स्कूली पढ़ाई के कारण गुम होते चले आ रहे है। इन खेलों को बच्चे सस्ते संसाधनो से अपने माता-पिता-बहन भाइयों के साथ खेल सकते है।

उ0प्र0 नॉन ओलम्पिक एसोसियेशन से मान्यता प्राप्त एवं सम्बद्ध खेल-
नॉन ओलम्पिक खेल-

‘ए’ श्रेणी

योग स्पोर्टस, शतरंज, कैरम, आट्या-पाटया, शूटिंग बॉल, पावर लिफ्टिंग, रोइंग / नदी में तैराकी, पतंगबाजी, रग्बी, वुशु, खो-खो देशी, कबड्डी देशी, गदा जोड़ी, कुंगफू, बाडी बिल्डिंग, फिटनेस बॉल आदि ।

‘बी’ श्रेणी

बेसबॉल, महिला फुटबॉल, किक बॉक्सिंग, आर्म रेसलिंग, चाक बॉल, दिव्यांग खेल, नट जिमनास्टिक, वेटरन स्पोर्टस, एयर स्पोर्टस, एडवेंचर स्पोर्टस, कबूतरबाजी, टेनीक्योट, मलखम्ब, ताइक्वांडो, मिनी गोल्फ आदि।

‘सी’ श्रेणी

फ्लोरलबॉल, मारबल स्टोन, थ्रो बाल, रैकेटबाल, स्कूल गेम्स, क्यू स्पोर्टस आदि।

1. पराम्परागत / भूले बिसरे खेल-

रस्सी कूद, लट्टू, गुल्ली डंडा, नहर में तैराकी, साइकिल पहिया रेस, तिगड़ी, सतैलिया, साइकिल रेस, सुर बग्घी, घोड़ा जमाल खाय, गुट्टक, गुलेल, लपटू डंडा, कुर्सी दौड़, सिगड़ी, कंचा गोली, चौसर, गेंद ताड़ी आदि।

2.ग्रामीण खेल-

ग्रामीण परिवेश के खेल- बैलगाड़ी दौड़, ठेलिया दौड़, तांगा दौड़, पैदल चलने की प्रतियोगिता, लाठी की पटेबाजी, देहाती दंगल, तीन बच्चों को लादकर 50 मीटर चलने की प्रतियोगिता। कुम्हारों हेतु :- कुल्हण बनाने की प्रतियोगिता। मजदूरों हेतु :- ईंट फेकने, ईंट सिर पर ले जाने की प्रतियोगिता। पल्लेदारों हेतु :- ट्राली में भरे बोरे लादने की प्रतियोगिता। छोटे बच्चों हेतु :- मोबाइल से मैसेज भेजने की प्रतियोगिता, सुलेख, सामान्य ज्ञान, चित्रकारी प्रतियोगिता, मुट्ठी जम्प, पानी में कागज की नाव चलाने की प्रतियोगिता, कागज का हवाई उड़ाना आदि।

3. 60 साल से ऊपर बुजुर्गो / प्रधान सरपंच हेतु :–

100 मीटर दौड़, पगड़ी बांधना, गुब्बारे फुलाना व जोर से हँसने की प्रतियोगिता।

4. महिलाओं / बालिकाओं हेतुः-

कुँए से पानी भरना, हैंडपम्प से पानी भरना, रंगोली, डलिया बुनना, कुर्सी दौड़, चिकन दस्तकारी, गुट्टा खेलना, तथा भैंस दुहने की मेंहदी प्रतियोगिता आदि।

हमारे देश की आत्मा गांव मे बसती है, ग्रामीण एवं गांवो की पृष्ठभूमि को देखते हुए आजिविका से जुड़े रोजगारपरक खेलों को सामुदायिक मनोरंजन के साथ कराकर ग्रामीणों, ग्रामीण श्रमिकों तथा ग्रामीण युवक-युवतियों की शारीरिक दक्षता मे निखार पैदा करके उनमें मेल-जोल, भाईचारा बढ़ाना उ.प्र. नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन का उद्देश्य है। इन खेलों की प्रतियोगितायें इन्सानी जिस्म-जज्बे-हौसले की सीमाओं का कड़ा इम्तिहान लेती है। बडा ही अदभुत दृश्य होता है जब एक ओर भोर के उजाले में गांव के मैदानों मे पारम्परिक खेल चल रहे होते हैं और दूसरी ओर लोग अपनी लोक-कला व लोक-गीत का प्रदर्शन कर रहे होते हैं।
प्रदेश मे पहली बार इसी विचारधारा से प्रेरित होकर वर्ष 2000 में डा. कश्मीर सिंह आई.पी.एस.(से.नि.) चैयरमैन द्वारा उ.प्र. नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन का गठन किया गया। आज उ.प्र. नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन अपने नये अध्यक्ष श्री अजय दीप सिंह आई.ए.एस. (से.नि.) के नेतृत्व में पुरातन – भूले-बिसरे – पराम्परागत – ग्रामीण – लोककलाओं – प्राचीन भारतीय संस्कृति तथा नॉन ओलम्पिक खेलों को कराकर नित्य नये आयाम स्थापित कर रही है, ताकि ग्रामीण परिवेश से छुपी प्रतिभायें चिन्हित की जा सके और इन खेलों को लोकप्रिय बनाकर उन्हे अर्न्तराष्ट्रीय दर्जा प्रदान किया जा सके। मोबाइल कम्प्यूटर गेम मे खो रहे नयी पीढ़ी के बच्चों को प्राकृतिक खेलो के प्रति रुझान पैदा किया जा सके साथ ही पुरातन खेलो को पुर्नजीवित किया जा सके। भारतीय खेलों को चिन्हित करके उनकी प्रतियोगितायें कराके व उनके खिलाड़ियों को भारतीय परिवेश मे अर्न्तराष्ट्रीय सुविधायें प्रदान करके ओलम्पिक व राष्ट्रमंडल खेलों मे शामिल कराया जा सके।

जय हिंद।
ए.के.सक्सेना

महासचिव

उ.प्र. नॉन ओलम्पिक एसोसिएशन

E-1263 राजाजीपुरम, लखनऊ -17

मो.- 9452832324

ई-मेलः- saxenaa004@gmail.com

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